रिश्ते कभी भी "कुदरती" मौत नहीं मरते
इनको हमेशा "इंसान" ही क़त्ल करता है
"नफ़रत" से,
"नजरअंदाजी" से,
तो कभी "गलतफ़हमी" से!

Shayaris

Hitesh Katara

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